नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या?

नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या? इसके पीछे लोगो मैं कई बाते मशहूर है। कुछ लोग संपत्ति को आधार मानकर तो कुछ लोग ईर्ष्या को आधार मानकर इसे गाँधीजी की हत्या से जोड़ते है तो कुछ लोग गाँधीजी की उपस्थिती मे पाकिस्तान के अलग होने को। लेकिन लोगो की बाटो या कहे तो अफवाहों को सही नहीं मान सकते। तो आखिर क्या वजह रही होगी की एक हिंदुस्तानी ने एक एक हिंदुस्तानी को गोली मार दी ओर उसे जिसके विचारो से वह खुद बहुत प्रभावित रहा था! नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या?

नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या

नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या? गाँधीजी की हत्या के कारण

इससे पहले जानते है की आखिर नथुरम गोडसे ने गाँधीजी की हत्या क्यो की, कुक अन्य बातों पर नजर डालते है।

गोडसे था गाँधीजी के विचारो से प्रभावित

BBC के एक पोस्ट मैं बताया गया है की नाथुराम गोडसे ने स्वयं कहा था की “वह गाँधीजी के विचारो से बहुत प्रभावित था। उनकी हर बात को धध्यान्स से पढ़ता था। गाँधीजी का सम्मान करता था।”

गोडसे ने यह भी कहा था की “पिछले 30 साल मे गाँधीजी और वीर सावरकर ने जितना असर भारतवासियों पर डाला है उतना किसी ओर ने नहीं”

इससे यह तो स्पष्ट है की गाँधीजी की हत्या के पीछे कोई सम्मान या प्रतिष्ठा related कोई वजह नहीं थी।

क्या हत्या के पीछे व्यक्तिगत कारण है?

एक बार नाथुराम गोडसे ने गाँधीजी के पुत्र देवदास गांधी से कहा था की उसे गाँधीजी की हत्या का बड़ा दूःख है। हत्या से उनके परिवार पर जो बीती है उसे वह समझ सकता है। वह खुद हिंदी अख़बार हिंदू राष्ट्र का संपादक है। गोडसे ने कहा था की वह उनका विश्वास करे की उसने गाँधीजी की हत्या किसी व्यक्तिगत लालच, कोई द्वेष या खराब व्यवहार के चलते नहीं किया।

क्या हत्या के पीछे कोई राजनीति है

नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्यादेवदास गांधी से बातचीत के दौरान गोडसे ने कहा था की उसने हत्या ‘केवल और केवल राजनीति के चक्कर’ मे की है।

गोडसे द्वारा गाँधीजी की हत्या के पीछे कारण

नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या, इसके पीछे कई कारण है। गोडसे ने गाँधीजी पर कई आरोप लगाए थे –

पहला आरोप– गोडसे के अनुसार गाँधीजी का वह सम्मान करता था लेकिन गाँधीजी अपनी बाटो पर अटल थे। वे खुद की बातों को अंतिम निर्णय मानते थे। गोडसे ने कहा था की यदि काँग्रेस गाँधीजी की बात नही मानती तो वह स्वयं की राह पर चलने को तैयार थे। यह एक मुख्य कारण था ताकि काँग्रेस संगठित रहे और एकता बनी रहे।

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दूसरा आरोप – गोडसे के अनुसार हिन्दू उनका पहला दायित्व था। एक देशभक्त और विश्व नागरिक होने के नाते 30 करोड़ हिंदुओं की स्वतंत्रता और हितों की रक्षा अपने आप पूरे भारत की रक्षा होगी। गोडसे ने कहा की “इस सोच ने मुझे हिंदू संगठन की विचारधारा और कार्यक्रम के नज़दीक किया। गोडसे के विचार से यही विचारधारा हिंदुस्तान को आज़ादी दिला सकती है और उसे कायम रख सकती। गोडसे ने गाँधीजी के बारे मे बहुत सोचा और विचार किया। जब गाँधीजी ने जब अपना अंतिम व्रत मुसलमानो के हिट मे रखा तो गोडसे को बहुत निराशा हुई और उसने सोचा को गांधी के अस्तित्व को बहुत जल्द खत्म करना होगा।

गोडसे के अनुसार गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका मे बहुत शानदार काम किया लेकिन जब वे हिंदुस्तान लौटे थे तो उनकी विचारधारा मे थोड़ा परिवर्तन था। इस बात ने नाथुराम गोडसे को उकसाया।नाथुराम गोडसे ने क्यो की गाँधीजी की हत्या

तीसरा कारण – गोडसे द्वारा तीसरा आरोप यह था की गाँधीजी ने पाकिस्तान के निर्माण मे मदद की। इतने बड़े गोडसे ने कहा की “जब गाँधीजी की सहमति से कॉंग्रेस के नेता इस पावन और जान से प्यारे देश का बटवारा कर रहे थे तो मेरे मे बहुत क्रोध भर गया।”

गोडसे ने कहा की “उसे गाँधीजी या किसी से व्यक्तिगत कोई समस्या नहीं थी लेकिन उस समय मौजूदा सरकार ज़्यादातर मुसलमानो के हिट मे थी और यह सब गाँधीजी की उपस्थिती मे हो रहा था।”

इस बातों से इतिहास बिलकुल विपरीत था। उन्होने कहा की काँग्रेस मे गाँधीजी तानशाह थे, भूख हड़ताल से अपनी बात मानवाते थे।

नाथुरम गोडसे ने कोर्ट मे जो बयान दिया और देवदास गांधी को जो बताया था वह बिलकुल अलग था की उसने केवल राजनीति के चलते हत्या की थी।

गोडसे गाँधीजी की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से बिलकुल भी सहमत नहीं था बलकि वह हिन्दुत्व के पक्ष मे था और राष्ट्रीय स्वमसेवक संघ ने उसका ब्रेनवाश किया था।


स्त्रोत – सम्पूर्ण जानकारी कोर्ट मे बयानो, गोडसे से देवदास गांधी से बातचीत व गोपाल गोडसे की पुस्तक आधारित है जो internet BBC पर से संकलित है।

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