साधनो का मोह – Mahaveer Swami Prerak Prasang

साधनो का मोह - Mahaveer Swami Prerak Prasangसाधनो का मोह – Mahaveer Swami Prerak Prasang

साधनो का मोह – महावीर स्वामी उन डीनो जंगल मे ताप कर रहे थे। जगल के ग्वाले उन्हे समाधिस्थल देख कर उनका उफस किया करठे थे। कुछ दुष्ट तो लांछन लगाकर उन्हे तंग किया करते थे। लेकिन महावीर स्वामी ज़रा भी विचलित न होकर अपना ध्यान बनाए रखते थे।

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तपस्या मे विग्न डालव्यवधान ने वालों की बात पास के व्यक्तियों के पास पहुची। वह के धनिक लोग महावीर के पास आए व कहने लगे की – ” देव! आपको कष्ट देकर ये नादान आपको असुविध मे दाल रहे है। हमारा आपसे निवेदन है की हम आपके लिय एक भवन यहा बनवा दे तथा एसी सुरख्स व्यवस्था करा दे , जिससे आप निश्चित साधना करते रहे।”

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“तात! साधनो का अनुचित मोह ही मनौश्य को सांसरिक बह=नाता है। एक बार उससे निकाल आने के बाद, जो आत्मशांति मिली है उसकी तुलना मे यह व्यवधान तुच्छ है। आप लोग मेरी चिंता न करे। उनकी इस धृढ्ता से ग्वाले पराभूत हो उठे, इसके बाद फिर ग्वालो ने उन्हे सताने की कोशिश नहीं की।

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